राम जन्मभूमि पहले कैसा था अयोध्या मैं भगवन राम जी का मंदिर पहले किसने बनवाया था एवं वर्तमान में कैसा दिखेगा आईये जानते हैं

पहले कैसा था अयोध्या मैं भगवन राम जी का मंदिर पहले किसने बनवाया था एवं वर्तमान में कैसा दिखेगा आईये जानते हैं

ट्रस्ट द्वारा जारी बयान के अनुसार मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वारसिंह द्वारहोगा। 2.77 एकड़ के मंदिर क्षेत्र में राजस्थान से लाए गए ग्रेनाइट पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है। बताया गया है कि मंदिर में कुल 392 स्तंभ होंगे और करीब 12 द्वारों का निर्माण किया जाएगा। गर्भगृह में 160 और प्रथम तल पर 132 स्तंभ होंगे।


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पहले कैसा था अयोध्या मैं भगवन राम जी का मंदिर पहले किसने बनवाया था एवं वर्तमान में कैसा दिखेगा आईये जानते हैं


भगवान राम की नगरी अयोध्या हजारों हापुरुषों की कर्मभूमि रही है। यह पवित्र भूमि हिन्दुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। यहां पर भगवान राम का जन्म हुआ था। यह राम जन्मभूमि है। इस राम जन्मभूमि पर एक भव्य मंदिर बना था जिसे तोड़ दिया गया था। अब जानते हैं की पहले भव्य मंदिर किसने बनाया और कैसा था वह मंदिर। शोधानुसार पता चलता है कि भगवान राम का जन्म ५११४ ईस्वी पूर्व हुआ था। चैत्र मास की नवमी को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है।

पुरातात्विक विभाग के सर्वे में कहा गया कि जहां बाबरी मस्जिद बनी थी, वहां मंदिर होने के संकेत मिले हैं। भूमि के अंदर दबे खंबे और अन्य अवशेषों पर अंकित चिन्ह और मिली पॉटरी से मंदिर होने के सबूत मिले हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा हर मिनट की वीडियोग्राफी और स्थिर चित्रण किया गया। इस खुदाई में कितनी ही दीवारें, फर्श और बराबर दूरी पर स्थित ५० जगहों से खंभों के आधारों की दो कतारें पाई गई थीं। एक शिव मंदिर भी दिखाई दिया। जीपीआरएस रिपोर्ट और भारतीय सर्वेक्षण विभाग की रिपोर्ट अब उच्च न्यायालय के रिकार्ड में दर्ज हैं। ३० सितम्बर, २०१० को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने विवादित ढांचे के संबंध में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। न्यायमूर्ति धर्मवीर शर्मा, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति एसयू खान ने एकमत से माना कि जहां रामलला विराजमान हैं, वही श्रीराम की जन्मभूमि है। अयोध्या पहले कौशल जनपद की राजधानी थी। वाल्मीकि कृत रामायण के बालकाण्ड में उल्लेख मिलता है कि अयोध्या १२ योजन-लम्बी और योजन चौड़ी थी। वाल्मीकि रामायण में अयोध्या पुरी का वर्णन विस्तार से किया गया है। रामायण में अयोध्या नगरी के सरयु तट पर बसे होने और उस नगरी के भव्य एवं समृद्ध होने का उल्लेख मिलता है। वहां चौड़ी सड़के और भव्य महल थे। बगीचे और आम के बाग थे और साथ ही चौराहों पर लगने वाले बड़े बड़े स्तंभ थे। हर व्यक्ति का घर राजमहल जैसा था। यह महापुरी बारह योजन (९६ मील) चौड़ी थी। इस नगरी में सुंदर, लंबी और चौड़ी सड़कें थीं। इन्द्र की अमरावती की तरह महाराज दशरथ ने उस पुरी को सजाया था।

क्या था जन्मभूमि का हाल : कहते हैं कि भगवान श्रीराम के जल समाधि लेने के पश्चात अयोध्या कुछ काल के लिए उजाड़-सी हो गई थी, लेकिन उनकी जन्मभूमि पर बना महल वैसे का वैसा ही था। भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने एक बार पुन: राजधानी अयोध्या का पुनर्निर्माण कराया। इस निर्माण के बाद सूर्यवंश की अगली 44 पीढ़ियों तक इसका अस्तित्व आखिरी राजा, महाराजा बृहद्बल तक अपने चरम पर रहा। कौशलराज बृहद्बल की मृत्यु महाभारत युद्ध में अभिमन्यु के हाथों हुई थी। महाभारत के युद्ध के बाद अयोध्या उजड़-सी हो गई, मगर श्रीराम जन्मभूमि का अस्तित्व फिर भी बना रहा।

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किसने बनाया भव्य मंदिर इसके बाद यह उल्लेख मिलता है कि ईसा के लगभग १०० वर्ष पूर्व उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य एक दिन आखेट करते-करते अयोध्या पहुंच गए। विक्रमादित्य को इस भूमि में कुछ चमत्कार दिखाई देने लगे। तब उन्होंने खोज आरंभ की और पास के योगी संतों की कृपा से उन्हें ज्ञात हुआ कि यह श्रीराम की अवध भूमि है। उन संतों के निर्देश से सम्राट ने यहां एक भव्य मंदिर के साथ ही कूप, सरोवर, महल आदि बनवाए। कहते हैं कि उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि पर काले रंग के कसौटी पत्थर वाले ८४ स्तंभों पर विशाल मंदिर का निर्माण करवाया था। इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती थी।

किसने करवाया जिर्णोद्धार : विक्रमादित्य के बाद के राजाओं ने समय-समय पर इस मंदिर की देख-रेख की। उन्हीं में से एक शुंग वंश के प्रथम शासक पुष्यमित्र शुंग ने भी मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। पुष्यमित्र का एक शिलालेख अयोध्या से प्राप्त हुआ था जिसमें उसे सेनापति कहा गया है तथा उसके द्वारा दो अश्वमेध यज्ञों के किए जाने का वर्णन है। अनेक अभिलेखों से ज्ञात होता है कि गुप्तवंशीय चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय और तत्पश्चात काफी समय तक अयोध्या गुप्त साम्राज्य की राजधानी थी। गुप्तकालीन महाकवि कालिदास ने अयोध्या का रघुवंश में कई बार उल्लेख किया है।

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किसने दी गवाही की भव्य मंदिर था : इसके बाद कहते हैं कि चीनी भिक्षु फा-हियान ने यहां देखा कि कई बौद्ध मठों का रिकॉर्ड रखा गया है। यहां पर वीं शताब्दी में चीनी यात्री हेनत्सांग आया था। उसके अनुसार यहां 20बौद्ध मंदिर थे तथा ३००० भिक्षु रहते थे और यहां हिन्दुओं का एक प्रमुख और भव्य मंदिर भी था, जहां रोज हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने आते थे जिसे कब शुरु हुआ मंदिर का पतन : इसके बाद ईसा की ११ वीं शताब्दी में कन्नौज नरेश जयचंद आया तो उसने मंदिर पर सम्राट विक्रमादित्य के प्रशस्ति शिलालेख को उखाड़कर अपना नाम लिखवा दिया। पानीपत के युद्ध के बाद जयचंद का भी अंत हो गया। इसके बाद भारतवर्ष पर आक्रांताओं का आक्रमण और बढ़ गया। आक्रमणकारियों ने काशी, मथुरा के साथ ही अयोध्या में भी लूटपाट की और पुजारियों की हत्या कर मूर्तियां तोड़ने का क्रम जारी रखा। लेकिन 14वीं सदी तक वे अयोध्या में राम मंदिर को तोड़ने में सफल नहीं हो पाए। विभिन्न आक्रमणों के बाद भी सभी झंझावातों को झेलते हुए श्रीराम की जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर 14वीं शताब्दी तक बचा रहा। कहते हैं कि सिकंदर लोदी के शासनकाल के दौरान यहां मंदिर मौजूद था। अंतत: 1527-२८ में अयोध्या में स्थित भव्य मंदिर को तोड़ दिया गया और उसकी जगह बाबरी ढांचा खड़ा किया गया। कहते हैं कि मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर के एक सेनापति ने बिहार अभियान के समय अयोध्या में श्रीराम के जन्मस्थान पर स्थित प्राचीन और भव्य मंदिर को तोड़कर एक मस्जिद बनवाई थी, जो १९९२ तक विद्यमान रही। बाबरनामा के अनुसार १५२८ में अयोध्या पड़ाव के दौरान बाबर ने मस्जिद निर्माण का आदेश दिया था।

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 मंदिर 20 फुट ऊंचे 392 खंभों पर खड़ा होगा, शिखर 161 फुट ऊंचा होगा.

अयोध्या में श्री राम जन्म भूमि में राम मंदिर बन जाने के बाद कैसा दिखेगा प्रभु राम जी का मंदिर उसकी तस्वीरें सामने आईं हैं. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर बनने के बाद किस तरह दिखेगा अयोध्या का श्री राम मंदिर इसकी तस्वीरें और वीडियो जारी कर दिए हैं. इन तस्वीरों में श्री राम जन्मभूमि मंदिर की भव्यता और दिव्यता देखी जा सकती है. बता दें कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर 20 फुट ऊंचे 392 खंभों पर खड़ा होगा जबकि मंदिर का शिखर 161 फुट ऊंचा होगा. अब 161 फुट ऊंचे मंदिर की विजय पताका को स्थापित करने के लिए 10 से 15 कुंतल स्तंभ का निर्माण किया जाएगा जिस पर विजय पताका लगाई जाएगी. इसकी पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है. हालांकि पताका मुख्य शिखर पर लगाई जाएगी लेकिन इसके अलावा 5 और शिखर मंडप बनाए जाएंगे. मुख्य शिखर से पूरब की तरफ 3 उससे छोटे शिखर होंगे. अगर इनके नाम की बात करें तो इनके नाम गुण मंडप, रंग मंडप और नृत्य मंडप रखे जाएंगे. इसके अलावा गुण मंडप के बगल में दो और मंडप भी बनाए जाएंगे जबकि मंदिर के मुख्य द्वार का नाम सिंह द्वार होगा.

रामकथा कुंज की भी होगी स्थापना


चंपत राय की मानें तो श्री राम जन्म भूमि मंदिर के अलावा श्री राम से जुड़े कुछ और मंदिर भी बनाए जाने हैं. इसी के साथ नक्षत्र वाटिका और श्रीराम के जीवन को मूर्तियों के माध्यम से बताने और समझाने के लिए रामकथा कुंज की स्थापना भी की जाएगी जिसमें मूर्तियों के नीचे रामायण की चौपाइयां भी लिखी होंगी.  ये चौपाइयां संबंधित प्रसंग को समझाने के लिए होंगी. श्री राम जन्मभूमि परिसर का बड़ा हिस्सा ग्रीन फील्ड होगा जिसमें रामायण कालीन वृक्ष लगाए जाएंगे.

 यात्री सुविधा केंद्र का होगा निर्माण

यात्री सुविधा केंद्र के निर्माण को जल् शुरू करने पर भी गंभीरता से चर्चा की गई है। यात्री सुविधा केंद्र का निर्माण मंदिर को जोड़ने वाले राम जन्मभूमि कॉरिडोर के मंदिर प्रवेश स्थल के पास ही बनेगा। वहां 25 हजार श्रद्धालुओं को अपने सामान आदि रखने के लिए लॉकर आदि की सुविधा मिलेगी। यहां से वे राम लला के दर्शन के बाद लौटते समय अपने सामान वापस ले सकेंगे।

 

भक्तों के लिए कब खुलेगा अयोध्या का राम मंदिर? जानें

राम मंदिर का निर्माण कार्य 50 प्रतिशत पूरा हो चुका है। रामलला के भक्तों के लिए एक बड़ी खबर है। राम मंदिर के उद्घाटन की तैयारियां पूरी हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकमकर संक्रांति के दिन गर्भगृह में रामलला की मूर्ति की स्थापना की जाएगी, इसके बाद जनवरी 2024 में अयोध्या में राम मंदिर भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मंगलवार को ये जानकारी दी।मंदिर भूकंप प्रतिरोधी और 1,000 से अधिक वर्षों तक चलने के लिए पर्याप्त मजबूत होगा। गर्भगृह का निर्माण इस तरह किया गया है कि राम नवमी पर सूर्य की किरणें राम लला की प्रतिमा पर पड़े।

मंदिर की पहली मंजिल दिसंबर 2023 तक तैयार हो जाएगी। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकार द्वारा आयोजित भव्य दीपोत्सव समारोह के छठे संस्करण का शुभारंभ करने के लिए अयोध्या की अपनी यात्रा के दौरान 23 अक्टूबर को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र स्थल की समीक्षा की। 5 अगस्त, 2020 को पीएम मोदी द्वारा राम मंदिर की आधारशिला रखने के बाद मंदिर का निर्माण तेज गति से शुरू हुआ था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लगातार अधिकारियों के संपर्क में हैं और हर महीने निर्माण कार्य की समीक्षा कर रहे हैं।

राम मंदिर की खास विशेषता

ट्रस्ट द्वारा जारी बयान के अनुसार मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वारसिंह द्वारहोगा। 2.77 एकड़ के मंदिर क्षेत्र में राजस्थान से लाए गए ग्रेनाइट पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है। बताया गया है कि मंदिर में कुल 392 स्तंभ होंगे और करीब 12 द्वारों का निर्माण किया जाएगा। गर्भगृह में 160 और प्रथम तल पर 132 स्तंभ होंगे।

 

 

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