कैसे मिलेंगे भगवन -प्रभु के दर्शन Tellers.live

प्रभु के दर्शन



*एक सिद्ध संत थे, जिनके बारे में कहा जाता था कि वे भगवान के साक्षात दर्शन किया करते थे।*

एक बार भिक्षाटन करते हुए महात्मा जी का पड़ाव किसी गांव में हुआ। गांव के जमींदार बहुत सम्पन्न थे और अब भगवत भजन में अपना मन लगाना चाहते थे, जब उन्हें पता लगा गांव की सीमा पर सिद्ध संत पड़ाव डाले हुए हैं तो वह महात्मा जी के पास पहुंचे और बोले...

"गुरु जी हमको भी भक्ति करनी है। लोग कहते हैं कि आप भगवान के साक्षात दर्शन करते हैं हमको भी देखना है।"

महात्मा जी ने जमीदार की बात को अनसुना कर दिया,,,और कथा करते रहे,,,नित्य यही कर्म चलता, जमीदार प्रतिदिन कथा में जाता और महात्मा जी से वही एक प्रश्न करता,,मुझे भी भगवान के साक्षात करने हैं,,महात्मा जी कथा वाचन करते रहते, जमींदार साहब के प्रश्न को अनसुना करते हुए।

कई दिन बीत गए, डेरा उठाने का समय हो चला था, बहता पानी रमता जोगी। जमींदार साहब फिर से पहुंच गए कि भगवान देखना है।

महात्मा जी ने एक क्षण सोचा विचार किया और जमींदार साहब को लेकर पास में बह रही नदी की ओर बढ़ गए। कमर भर पानी में पहुंच कर महात्मा जी ने कहा, "जमीदार साहब डुबकी मारिए, और जब तक सांस हो, पानी में ही डूबे रहिए।"

जमींदार साहब ने अपना भरपूर प्रयास किया लेकिन सांस की वायु खत्म हो जाने के बाद पानी में से खड़े होने लगे।

यह देखते ही महात्मा जी ने लपक कर जमींदार साहब की गुद्दी दबोची, और वापिस डुबो दिया पानी में..

जमींदार साहब छटपटाने लगे,, जब सांस ही नहीं रह गई थी तो कोई भी छटपटाता। एक दम जब जान जाने की आकुलता उत्पन्न हो गई तो महात्मा जी ने छोड़ दिया।

बाहर आने पर जब सांस व्यवस्थित हुई तब महात्मा जी ने पूछा, "जमीदार साहब अभी किस चीज की इच्छा हो रही थी आपको?"



"जमीदार बोला...सांस लेने की।"

"ऐसे समय तुम्हें घर बंगला गाड़ी कोई सांस के बदले में दे रहा हो तो?"

"पगला गए हैं क्या महात्मा जी? उस समय सांस के अलावा कोई और क्या चाहेगा?"*

तब महात्मा जी ने गम्भीर स्वर में कहा, जमीदार साहब "जब ऐसी ही आकुलता आपको केवल भगवान के लिए होगी तो भगवान स्वयं भागे चले आयेंगे। वे आपकी धीमी से धीमी सी पुकार भी सुन लेंगे!

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